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शिकोहाबाद: संयुक्त चिकित्सालय में राम भरोसे है जच्चा-बच्चा की जान

-महिला चिकित्सक की गैर मौजूदगी में स्टाफ करा रहा प्रसव

शिकोहाबाद। शासन और प्रशासनिक अधिकारी गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान संयुक्त चिकित्सालय में प्रसव कराने के लिए लोगों को जागरूक कर रहे हैं। लेकिन अस्पताल में विगत 20 दिन से महिला डॉक्टर नहीं है। उनकी गैर मौजूदगी में अस्पताल में तैनात स्टाफ ही प्रसव करा रहा है। ऐसी हालत में जच्चा-बच्चा दोनों की जिंदगी भगवान भरोसे है। ज्यादातर केशों को यहां तैनात स्टाफ परिचित डॉक्टरों द्वारा खोले गये अवैध अस्पतालों में भेज देते हैं। जिनसे उन्हें सुविधा शुल्क भी मिलता है।

संयुक्त चिकित्सालय का महिला अस्पताल इन दिनों बिना डॉक्टर के संचालित हो रहा है। यहां प्रतिदिन लगभग पांच महिलाओं की डिलेवरी होती है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं की जान का खतरा हर समय बना रहता है। अस्पताल में तैनात एएनएम और स्टाफ नर्स ही प्रसव करा रही हैं। आरोप है कि ज्यादातर केशों को यहां तैनात स्टाफ और आशा बहुओं की साठगांठ से प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों को भेज दिया जाता है।

जहां आए दिन कोई न कोई घटना सुनने को मिलती है। सोमवार को मेलावाला बाग स्थित एक अवैध अस्पताल में प्रसव के दौरान नवजात की मौत हो गई। जिसको लेकर मृतक बच्ची के परिजनों ने शिकायत की। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने अस्पताल को सील कर दिया है। उधर पीड़ित ने थाने में एक तहरीर भी दी है। अब देखना है कि अधिकारी इन लोगों के खिलाफ क्या कार्यवाही करते हैं।

सील होने के कुछ दिनों बाद ही खुल जाते हैं अस्पताल

नगर में कई अस्पताल एसे हैं, जिनमें प्रसव के दौरान प्रसूता अथवा नवजात की मौत हो चुकी हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन अस्पतालों के खिलाफ कार्यवाही की जाती है। प्रशासनिक अधिकारी उन्हें सील कर देते हैं। लेकिन चंद दिनों बाद ही यह अस्पतालों की सील खुल जाती है और ये लोग दोवारा काम शुरू कर देते हैं।

नगर क्षेत्र में बड़ी संख्या में घरों और अंडरग्राउंड मकानों में इस तरह के अवैध अस्पताल संचालित हो रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग कुंभकर्णीय निंद्रा में सो रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को जनता की मौत से कोई सरोकार नहीं है। उन्हें तो बस मोटी कमाई करनी है।

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