फिरोजाबाद- निःस्वार्थ भाव से किया गया दान अत्यन्त फलदाई होता है-स्वामी सत्यानंद महाराज

फिरोजाबाद। अखिल भारतीय सोहम महामंडल के तत्वावधान में आयोजित संत सम्मेलन में स्वामी सत्यानंद महाराज ने कहा कि जहां प्राणी के जीवन में सेवा और परोपकार का महत्व है, दान भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

महाराज श्री ने कहा कि दान से धर्म का पालन होता है। दान करने के अनेक रूप हैं गरीब, असहाय, गौ-माता, संत जन किसी भी जरूरतमंद की सेवा और दान कर सकते हैं। निस्वार्थ भाव से किया गया दान और विशेष रुप से गुप्त दान अधिक पूर्ण फलदाई होता है। सेवा परोपकार से मानव में सद्गुण दया, करुणा, प्रेम, सत्य और शुभ संस्कार आते हैं। प्रत्येक मानव को अपने जीवन को कल्याणकारी बनाने के लिए यथाशक्ति दान सेवा का संकल्प अवश्य करना चाहिए। शुकदेवानंद महाराज ने कहा कि मनुष्य को इंद्रियों पर संयम करके मन को सेवा में लगाना चाहिए। मानव जीवन ही धर्म है। सम्मेलन में स्वामी प्रणवानंद, भारतान्न्द, अनंतानंद, प्रज्ञानंद, प्रीतम दास, नारायण, आनंद ब्रह्मचारी, अरुण देव आदि द्वारा भी धर्म चर्चा की गई।

श्रीमद् भागवत कथा में कथा व्यास पंडित राम गोपाल शास्त्री ने भगवान कृष्ण एवं सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान के यहां कोई अमीर, गरीब नहीं है उनके लिए सभी एक समान है। भगवान तब बड़े प्रसन्न होते हैं जब कोई अमीर गरीब की सेवा करें और गरीब अमीर को आशीर्वाद दें। सुदामा अपनी पत्नी के कहने पर भगवान से मिलने गए तो भगवान तभी जान गए क्योंकि वह तो अंतर्यामी हैं। बिना मांगे भगवान ने सुदामा को सभी कुछ दे दिया। उन्होंने कहा आज कृष्ण सुदामा जैसे मित्र देखने को नहीं मिलते है। संत सम्मेलन में गुरुवार को स्वामी सत्यानंद महाराज का नगर के गणमान्य लोगों द्वारा सम्मान किया गया। जिसमें मुख्य रुप से महापौर नूतन राठौर, शील मणि शर्मा, अनुपम शर्मा, नगर आयुक्त घनश्याम मीणा, मुख्य अभियंता मनीष, महाप्रबंधक जलकल विभाग रामबाबू राजपूत, संदीप भार्गव, देवीचरन अग्रवाल, हरबंश शमार्, अनूप चंद जैन, चंद्र प्रकाश शर्मा, संजय शर्मा, हरिओम वर्मा, प्रमोद राजोरिया, विजय शर्मा, सर्वेश दीक्षित आदि रहे।

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