फिरोजाबाद: सिद्ध चक्र विधान में भक्ति और अध्यात्म का अनूठा संगम है-सुनील जैन

फिरोजाबाद। मुनि अमित सागर महाराज के सानिध्य में राजा का ताल में प्राचीन पाश्र्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर के विद्या नंद संत सदन तथा महावीर जिनालय में इन दिनों धर्म की बयार बह रही है। प्रतिदिन सिद्ध चक्र विधान में विधान के साथ-साथ अनेकों धार्मिक एवं सांस्कृक्ति कार्यक्रम सम्पन्न हो रहें हैं। श्रद्धालु भी संगीतकार की मधुर ध्वनि पर झूम झूम कर धर्म लाभ ले रहे हैं।

महावीर जिनालय तथा राजा का ताल जिनालय में सिद्ध चक्र विधान का आयोजन श्रद्धांलुओं द्वारा किया जा रहा है। आज अष्टांनिका पर्व के पांचवे दिन दोनों जिनालयों में प्रातः श्रीजी का जिनाभिषेक किया गया। तत्पश्चात् श्रीजी की शांतिधारा हुई। जिसका सौभाग्य डिमांपुर से पधारे जिनभक्त अशोक कुमार जैन, विमल कुमार जैन एवं रवि जैन को मिला।

शांतिधारा के पश्चात् महावीर जिनालय में आगरा से पधारे विधानाचार्य राकेश जैन शास्त्री एवं राजा का ताल स्थित पाशर्वनाथ जिनालय में इंदौर से पधारे विधानाचार्य सुनील जैन शास्त्री ने मन्त्रोंच्चारण द्वारा पूर्ण विधि विधान से विधान प्रारम्भ कराया। जिसमे श्रद्धांलुओं ने कुल 128 अघ्र्य श्रीजी के सम्मुख समर्पित किये।

विधानाचार्य सुनील जैन शास्त्री धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि सिद्ध चक्र विधान में भक्ति और अध्यात्म का अनूठा संगम है। उनके अनुसार विधान में सिद्धों की श्रेणी में शामिल होने के लिए नियम, उपाय आदि बताए गए हैं। उनके गुणों का वर्णन भिन्न-भिन्न तरह से किया गया है।

इस दौरान अरुण जैन पीली कोठी, राजेंद्र प्रसाद जैन, अजय जैन एडवोकेट, मुकेश चंद्र जैन, राजेंद्र कुमार जैन, नीरज जैन, मनोज जैन दद्दा, अमन जैन, सुभाष चंद्र जैन एडवोकेट, छुट्टन बाबू जैन, संजय जैन, देवेंद्र जैन, राजेश जैन, पदम् चंद्र जैन, राकेश कुमार जैन, प्रभात जैन, सोनू जैन, धर्मेन्द्र जैन उपस्थित थे।

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