फिरोजाबाद: पुरानी पेंशन बहाली को लेकर कर्मचारियों की हुई बैठक

फिरोजाबाद। अटेवा पेंशन बचाओ मंच के बैनर तले पिछले आठ वर्षो से पुरानी पेंशन बहाली के लिए लगातार संघर्ष किया जा रहा है। इस संघर्ष के दौरान कई राज्यों में पुरानी पेंशन लागू करने की घोषणा भी की जा चुकी है। इसी को लेकर शनिवार को जिला मुख्यालय दबरई पर सभी संगठनों के पदाधिकारियों की एक संयुक्त बैठक आयोजित की गयी। जिसमें वर्तमान समय में पुरानी पेंशन बहाली को लेकर आगामी रणनीति को लेकर चर्चा की गई।

कर्मचारी संघ के अध्यक्ष प्रेमप्रकाश कुशवाह ने कहा कि लोकसभा चुनाव में पुरानी पेंशन एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है। पिछली सरकार द्वारा पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे को हल करने का कोई ठोस कदम न उठाये जाने से नाराज देश के सभी शिक्षक, कर्मचारी द्वारा चुनाव के दौरान वोट फॉर ओपीएस अभियान चलाकर सरकार के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त की गई है। जिससे एनडीए की सरकार को काफी नुकसान हुआ है।

अटेवा जिलाध्यक्ष धर्मेन्द्र कुमार कृष्णज ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 45 सीटों पर पोस्ट बैलेट में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा है, जो की सरकार के लिए बहुत बड़ा सबक है। जिसको लेकर पार्टी के अंदर मंथन चिंतन का दौर जारी है। बैठक में पुरानी पेंशन बहाली की इच्छा रखने वाले शिक्षक कर्मचारियों को एक मंच पर लाने का आहवान किया। साथ ही एक बार पुनः संकल्प लिया कि पुरानी पेंशन बहाली तक अपना संघर्ष जारी रखेंगे। वहीं लोकसभा चुनाव 2024 में मतदान ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले 58 शिक्षक, कर्मचारियों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। सरकार से मांग की गई कि उनके परिवारों के भरण पोषण की जिम्मेदारी सरकार उठाए।

इस मौके पर अटेवा जिलाध्यक्ष धर्मेन्द्र कुमार कृष्णज, जगवीर सिंह, रजनीश कुमार, रमेशचन्द्र शाक्य, धर्मेन्द्र कुमार, अनिल कुमार, संदीप दीक्षित, नरेन्द्र शर्मा, शिवा मैसी, योगेश चंद्र यादव, संजय, सुनील कुमार, रविकात्त, वीनेन्द्र, श्रीनिवास, चंदन यादव, राकेश मुनेन्द्र आदि मौजूद रहे।

 

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रवि एक प्रतिभाशाली लेखक हैं जो हिंदी साहित्य के क्षेत्र में अपनी अनूठी शैली और गहन विचारधारा के लिए जाने जाते हैं। उनकी लेखनी में जीवन के विविध पहलुओं का गहन विश्लेषण और सरल भाषा में जटिल भावनाओं की अभिव्यक्ति होती है। रवि के लेखन का प्रमुख उद्देश्य समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना और पाठकों को आत्मविश्लेषण के लिए प्रेरित करना है। वे विभिन्न विधाओं में लिखते हैं,। रवि की लेखनी में मानवीय संवेदनाएँ, सामाजिक मुद्दे और सांस्कृतिक विविधता का अद्वितीय समावेश होता है।

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