शिकोहाबाद: नगर पालिका की टीम नाले की नाप-तौल करने दौड़ी

-पालिका नाले का पानी निकासी के लिए लगाई जैनरेटर
-दोनों नालों में पांच फीट ऊंचाई का है अंतर

शिकोहाबाद। नगर पालिका द्वारा बनाये गए नाले में लगभग 5 फीट ऊंचाई का अंतर है। पालिका ने जो नाला तहसील तिराहा से बैजल नारायण तिराहा तक बनाया है वह काफी गहरा है। जबकि नारायण तिराहा से सिरसानदी तक जो नाला बना है, उसकी ऊंचाई पांच भीट है। जिससे नारायण तिराहा से पानी इस नाले में नहीं पहुंच सकता है। जबकि नारायण तिराहा से जो कट पालिका ने दिया है, उसकी बजह से जलभराव की समस्या रहती है। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए अब पालिका नारायण तिराहा पर एक जैनरेटर सेट लगा कर पानी को सिरसानदी को जाने वाले नाले में डालेगी। जिससे लोगों को जल भराव से निजात मिल सके।

पालिका की पोल खोलते हुए नाला निर्माण में की गई धांधली की खबर प्रमुखता से समाचार पत्रों में प्रकाशित की गई। जिसके बाद सुबह से ही पालिका की टीम नाला की नाप-तौल के लिए दौड़ने लगी। जेई के साथ ईओ सुरेंद्र प्रताप सिंह, कार्यालय अध्यक्ष ह्रदयराम यादव, नानक चंद्र कश्यप, रजनीश यादव, ठेकेदार सहित कई सभासद भी मौजूद रहे। नाला की नाप की गई तो नारायण तिराहा तक बने नाला और नारायण तिराहा से सिरसानदी तक बने नाले की ऊंचाई में लगभग पांच फीट का अंदर है। ऐसे में नारायण तिराहा से आने वाला पानी उक्त नाले में नहीं जा सकता है। इस पानी को निकालने के लिए अब पालिका ने निर्णय लिया है कि बैजल स्वीट्स की दुकान के पास एक जैनरेटर सैट रखा जाएगा, जो बिजली और डीजल दोनों से चालू होगा। जिससे बारिस के समय यह जैनरेटर चला कर पानी को ऊंचाई वाले नाले में सिफ्ट कर तहसील तिराहा, यादव कॉलोनी व अन्य मोहल्लों में होने वाले जल भराव से लोगों को निजात दिलाई जा सके।

-नाले निर्माण के समय नहीं रखा जाता है ध्यान

पालिका द्वारा जब भी नाला निर्माण का कार्य कराया जाता है, कभी भी नाले की ऊंचाई और जल निकासी का सही प्रबंधन का ध्यान नहीं रखा जाता है। पालिका जनता के पैसे को इसी तरह बंदरवाट कर बर्बाद करती रहती है। जब नारायण तिराहा से सिरसानदी तक नाला निर्माण कराया था, तभी पालिका को इस बात का ध्यान रखना चाहिए था कि इस नाले में पीछे से आने वाला पानी कैसे चढ़ेगा। अगर पालिका के तत्कालीन अधिशाषी अधिकारी, पालिका की टीम और जेई अगर पहले ध्यान देते तो आज जल भराव की समस्या ही नहीं होती। जनता का करोड़ों रुपया नाला निर्माण में खर्च किया जाता है, लेकिन इसके बाद भी जनता को कोई लाभ नहीं मिल पाता। यही हाल शहर की गलियों का है। कोई गली कहीं ऊंची तो कहीं नीची है। इससे जल भराव की समस्या बनी रहती है। जब तक पालिका के अधिकारी और कर्मचारी ईमानदारी से जनता के पैसे का सदुपयोग नहीं करेंगे, तब तक जनता रोती-चिल्लाती रहेगी।

 

Dinesh
Dinesh

दीनेश वशिष्ठ एक अनुभवी और समर्पित पत्रकार हैं, जो पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी गहन समझ और निष्पक्ष रिपोर्टिंग के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने पत्रकारिता में कई वर्षों का अनुभव अर्जित किया है। दीनेश की विशेषता उनकी गहरी शोध क्षमता और सत्य को उजागर करने की प्रतिबद्धता है। उन्होंने कई महत्वपूर्ण घटनाओं को कवर किया है और उनके रिपोर्ट्स ने समाज पर सकारात्मक प्रभाव डाला है।

Articles: 688