फिरोजाबाद: उत्सव के साथ मना सोमदत्त सागर महाराज का 47 वां अवतरण दिवस

फिरोजाबाद। राजा का ताल स्थित अतिशय क्षेत्र पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर पर सोमदत्त सागर महाराज विराजमान है, जिनका मांगलिक चातुर्मास राजा का ताल में होना सुनिश्चित हुआ है। चातुर्मास हेतु मंगल कलश की स्थापना 22 जुलाई को होगी।

गुरूवार को सोमदत्त सागर महाराज का 47 वां अवतरण दिवस बड़ी धूमधाम के साथ राजा के ताल जैन मंदिर पर मनाया गया। वहीं संत शिरोमणि आचार्य गुरु विद्यासागर महाराज का दीक्षा जयंती कार्यक्रम भी मनाया गया। गुरुदेव के सानिध्य में मंदिर में श्रीजी का अभिषेक कर शांति धारा हुई। उसके बाद पूज्य गुरुदेव का पाद प्रछालन किया गया। जिसका सौभाग्य महेश चंद जैन, नितिन जैन परिवार ने प्राप्त किया। मुनि श्री को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य सुविधि जैन, सिद्धेश जैन परिवार को प्राप्त हुआ। अष्ट द्रव्य के थाल लेकर विधि विधान से परम पूज्य आचार्य गुरु विद्यासागर महाराज, आचार्य गुरुवर निर्भय सागर महाराज एवं गुरु सोमदत्त सागर महाराज की पूजा अर्चना की गई।

गुरूदेव ने धर्मसभा को संबोंधित करते हुए जिन धर्म की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि अपनी इंद्रियों को जितने का नाम ही जिनेंद्र है। हम जितना तप संयम त्याग तपस्या करेंगे, तभी हम इस जीवन को सुखमय बना सकते हैं। यह जीवन भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए नही बल्कि सभी जीवो पर दया, करुणा, प्रेम, वात्सल्य रखना ही जीवन जीने का परम कर्तव्य है। पूज्य गुरुदेव ने अपने अवतरण दिवस पर कहां की मां के द्वारा जन्म देना व्यक्ति का सौभाग्य होता है और गुरु के द्वारा दीक्षा देना यह व्यक्ति का परम सौभाग्य बन जाता है। मोक्ष की प्राप्ति के लिए तप, त्याग, तपस्या, संयम का रखना बहुत आवश्यक है। 47वीं अवतरण दिवस पर 47 दीपों के द्वारा महाआरती का आयोजन किया गया।

जिसका सौभाग्य प्रवीण जैन को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में सुविधि जैन, प्रवीण कुमार जैन, राजेश कुमार जैन, राजेंद्र कुमार जैन, अरुण जैन, गौरव जैन, सोनू जैन, विक्रम जैन, रूपेश जैन, प्रभात जैन, क्षमा जैन, कुमकुम जैन, रजनी देवी जैन, पारुल जैन, साधना जैन, किंजल जैन, मानवी जैन आदि मौजूद रहे।

 

praveen upadhyay
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शालू एक उत्साही और समर्पित पत्रकार हैं, जो पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी ताजगी और नवाचार के लिए पहचानी जाती हैं। उन्होंने विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक मुद्दों पर गहरी और संवेदनशील रिपोर्टिंग की है। शालू की लेखनी की विशेषता उनकी संवेदनशील दृष्टिकोण और सटीक तथ्यों की प्रस्तुति है, जो पाठकों को घटनाओं की वास्तविकता से रूबरू कराती है।

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