फिरोजाबाद: शांतिनाथ विधान एवं विश्वशांति महायज्ञ में उमड़ भक्तों का सैलाब

फिरोजाबाद। श्री रत्नत्रय दिगम्बर जैन मंदिर नसिया पर बालयोगी प्रज्ञाश्रमण अमित सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में आज तक के इतिहास में प्रथम बार रत्न रचित मांडले पर 8 से 24 मई दिन शुक्रवार तक चल रहे सोलह दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान एवं विश्वशांति महायज्ञ के 11वे दिन भक्तो ने पूरे भक्ति भाव के साथ प्रभु को अर्ध समर्पित किए। जिसमे फिरोजाबाद सहित बाहर से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर स्वयं को धन्य बनाया।

शनिवार को प्रातः सर्वप्रथम मुनि अमित सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में योगध्यान शिविर का आयोजन किया गया। तत्पश्चात श्रीजी का अभिषेक तथा शांति धारा पूरे मंत्रोच्चारण के साथ की गई। इसके बाद नित्य नियम पूजा प्रारंभ हुई। अंत में सैकड़ों श्रद्धालुओं द्वारा श्री शांतिनाथ विधान संपन्न हुआ। विधान में भक्तो ने श्रीजी के रत्न रचित मांडले पर पूरे भक्ति भाव के साथ नाच गाकर अर्ध चढ़ाए। विधान में फिरोजाबाद ही नहीं बल्कि दूर’दूर से आए भक्तो ने हिस्सा लेकर स्वयं को धन्य बनाया।

मुनि अमित सागर महाराज ने विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए चल रहे विधान के महत्व पर भक्तो को विस्तार से बताएं। शनिवार को हुए विधान के पुण्यार्जक अजय जैन बजाज, रितु जैन, नवीन जैन, नम्रता जैन, विनय कुमार जैन, अनिल जैन, धर्म चंद जैन आदि रहे। वही मोहित जैन, मुकेश जैन, संगीता जैन, बुलबुल जैन, लवली जैन, गुंजन जैन, डोली जैन आदि का भी सहयोग रहा।

मीडिया प्रभारी राज जैन ने बताया की शायं कालीन सभा में सैकड़ों भक्तो द्वारा श्रीजी संगीतमय आरती का आयोजन किया जायेगा। तत्पश्चात ज्ञानवर्धक प्रतियोगिताएं तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम सभी भक्तो के बीच आकर्षण का केंद्र रहेगें। अजय जैन बजाज ने बताया की विधान के अंतिम दिन 24 मई दिन शुक्रवार को विश्वशांति महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा।

 

Ravi
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रवि एक प्रतिभाशाली लेखक हैं जो हिंदी साहित्य के क्षेत्र में अपनी अनूठी शैली और गहन विचारधारा के लिए जाने जाते हैं। उनकी लेखनी में जीवन के विविध पहलुओं का गहन विश्लेषण और सरल भाषा में जटिल भावनाओं की अभिव्यक्ति होती है। रवि के लेखन का प्रमुख उद्देश्य समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना और पाठकों को आत्मविश्लेषण के लिए प्रेरित करना है। वे विभिन्न विधाओं में लिखते हैं,। रवि की लेखनी में मानवीय संवेदनाएँ, सामाजिक मुद्दे और सांस्कृतिक विविधता का अद्वितीय समावेश होता है।

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