फिरोजाबाद: शीशम के पेड़ की टहनी पकड़कर महिला ने बचाई जान

-हाथरस भोले बाबा के सत्संग में गई थीं महिला, फिरोजाबाद से गईं थीं पांच बस

फिरोजाबाद। हाथरस में भोले बाबा सत्संग में हुई भगदड़ की घटना के बीच जान बचाकर घर पहुंची महिला ने आंखों देखा हाल बताया। घर पहुंची महिला ने बताया कि जिस समय भगदड़ मची थी। उसने शीशम के पेड़ की टहनी पकड़कर अपनी जान बचाई। फिरोजाबाद से पांच बसें हाथरस सत्संग में गई थीं। जिसमें उनकी बस के अंदर 74 महिला और पुरुष सवार थे। जिस समय यह हादसा हुआ। चीख पुकार मच गई थी, लेकिन लोगों की भीड़ में उनकी चीख पुकार सुनकर भी कोई मदद को नहीं पहुंच सका।

फिरोजाबाद के सत्यनगर में रहने वाली आरती देवी ने बताया कि वह विगत 10 सालों से भोले बाबा के सत्संग में शामिल होने के लिए जा रही हैं। आसपास के जिलों में जहां बाबा का सत्संग होता है। वह वहां शामिल होने के लिए जाती हैं। मंगलवार को भी फिरोजाबाद से पांच बसें हाथरस सत्संग में शामिल होने के लिए गई थीं। उनकी बस में 74 महिला पुरुष सवार थे। बाबा का सत्संग 12 बजे शुरू हुआ और एक बजे करीब समाप्त हो गया। गुरूजी जैसे ही उठकर जाने लगे। लोग उनके दर्शनों के लिए उनके पीछे-पीछे भाग रहे थे। जाम लगा हुआ था। बस, ट्रक समेत अन्य वाहन जाम में फंसे थे।

तभी कुछ लोग खाई में गिर गए। वह भी धक्का लगने की वजह से खाई में गिरने वाली थीं, लेकिन वहां खड़े शीशम के पेड़ की टहनी को उन्होंने पकड़ लिया। जिसे पकड़कर वह दूसरी पार निकल गईं और उनकी जान बच गई। वहां का नजारा देखकर उनके होश उड़ गए। उन्हें केवल अपना घर दिखाई दे रहा था। उनका मोबाइल बैग में रखा हुआ था। टीवी पर जब खबर चली तो परिजनों ने उन्हें फोन किया। वह किसी तरह बस तक पहुंची और जान बचाकर घर आई हैं। वहां का नजारा बहुत ही भयावह था।

 

Ravi
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रवि एक प्रतिभाशाली लेखक हैं जो हिंदी साहित्य के क्षेत्र में अपनी अनूठी शैली और गहन विचारधारा के लिए जाने जाते हैं। उनकी लेखनी में जीवन के विविध पहलुओं का गहन विश्लेषण और सरल भाषा में जटिल भावनाओं की अभिव्यक्ति होती है। रवि के लेखन का प्रमुख उद्देश्य समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना और पाठकों को आत्मविश्लेषण के लिए प्रेरित करना है। वे विभिन्न विधाओं में लिखते हैं,। रवि की लेखनी में मानवीय संवेदनाएँ, सामाजिक मुद्दे और सांस्कृतिक विविधता का अद्वितीय समावेश होता है।

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