टूंडला: शांतिनाथ जैन मंदिर में हुए धार्मिक कार्यक्रम

टूंडला। शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर एटा रोड पर भगवान जिनेन्द्र देव की जिनवाणी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें सैकड़ों की संख्या में जैन समाज के महिला-पुरूष शामिल रहे।

स अवसर पर आचार्य निर्भय सागर महाराज ने शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में प्रश्न उत्तर रत्न मालिका ग्रंथ की वाचना में कहा कि जिनेंद्र भगवान की वाणी जग कल्याणी होती है। जिसे जिनवाणी है, जनवाणी नही, जनवाणी मनोरंजन संसार चलने के लिए, पैसा कमाने के लिए। राजनीति के लिय होती है। लेकिन जिनेन्द्र प्रभु के मुख से निकली हुई वाणी जगत के कल्याण के लिए होती है। जिन्होंने अपनी इंद्रिय को जीत लिया है वह जिनेंद्र कहलाते है।

उन्होंने आगे कहा कि जो गुरु के वचनों को ग्रहण करके अपने जीवन में उतार लेता है वह दुनिया में सबसे भाग्यवान व्यक्ति होता है। आचरण में ढ़ला हुआ ज्ञान विज्ञान कहलाता है, अनुभूति में ढ़ला हुआ ज्ञान प्रायोगिक ज्ञान कहलाता है। अध्यात्म क्षेत्र में ज्ञान का नहीं विज्ञान का महत्व है। क्योंकि मोक्ष मार्ग में चरित्र के बिना ज्ञान का कोई महत्व नहीं। एक सम्यक दृष्टि उसी प्रकार धार्मिक क्रियाओं अलर्ट और उत्साहित रहता है जैसे ट्रेन की घंटी बजते ही सभी यात्री अलर्ट होकर ट्रेन पकड़ने के लिए दौड़ते है। स्कूल में घंटी बजते ही अलर्ट होकर बच्चे दौड़ते है।

अदालत में पेशी की घंटी बजते ही सभी लोग अलर्ट हो जाते है, घर की डोर बेल बजते ही अलर्ट होकर तत्काल गेट की ओर भागते है। फोन की घंटी बजते ही अलर्ट होकर फोन की ओर भागते है। उसी प्रकार भगवान के मन्दिर की घंटी बजते ही अभिषेक पूजन के लिए सम्यक दृष्टि मन्दिर की ओर भागता है। गुरु की महिमा बताते हुए कहा गुरु एक गीत है गुरु एक संगीत है गुरु हर शिष्य की श्वास है गुरु एक आस है गुरु एक सम्वल है। गुरु ही आलम्बन है गुरु ही ज्ञान है सच मानो तो गुरु ही प्राण है।

गुरु ही जहान है गुरु ही समाधान है गुरु हवन है तो गुरु ही पूजन है। गुरु का नाम ही जप है गुरु का आदर ही तप है गुरु गुण ही आरती है और गुरु के वचन ही भारतीय है। गुरु ही भजन है गुरु के वचन ही भोजन है गुरु ही साज है गुरु ही राज है गुरु जग में प्यारे है और गुरु ही सबसे न्यारे है। गुरु ही चन्दन है तो गुरु ही नंदन है गुरु से हमारी गरिमा है गुरु से ही महिमा है। इसलिए गुरु ही महान है और गुरु ही भगवान है।

आज वाचना प्रारंभ करने से पूर्व डाॅ. शैलेंद्र जैन, विनोद कुमार जैन, देवसेन कौनदे, नको चित्र अनावरण, दीप प्रज्ज्वलन, आचार्य का पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में जैन समाज के लोग मौजूद रहे।

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