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फिरोाजाबाद: भगवान श्रीराम ने मानस रूप में रहकर भारतीय संस्कृति की रक्षा की-विश्वेश्वरी देवी

फिरोाजाबाद। हनुमान जयंती महोत्सव समिति की 114 वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में रामलीला मैदान में प्रतिदिन रामकथा की अमृत वर्षा हो रही। जिसका सभी धर्म प्रेमी धर्मलाभ ले रहें है।

हरिद्वारा धाम से पधारी कथा व्यास साध्वी डाॅ विश्वेश्वरी देवी ने भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि निराकार रूप से सर्वत्र विद्यमान परमात्मा ज्ञानियों को आनंद प्रदान करते है। भक्तों को आनंद देने के लिए निराकार से साकर बनकर आना पड़ता है। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम का अवतार अनेक संस्कृतियों की जाति एवं भाषाओं को तथा ख्ंाडित भारत वर्ष को जोड़ने के लिए हुआ। श्रीराम ने अवध और मिथिला की संस्कृतियों को जोडा।

उन्होंने कहा कि किष्किधा एवं लंका तक की यात्रा करते हुए अनेेक जन जातियों एवं पृथक आचार विचार वाले लोगों को जोड़कर अंखड भारत की स्थापना की। जब अयोध्या में भगवान राम का जन्म हुआ, तो भगवान शंकर भी मदारी का रूप धारण कर उनके दर्शन करने आयें। गुरू विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा करते हुए ताड़िका राक्षसी का वध कर उनके यज्ञ को पूर्ण कराया। भगवान ने मानस रूप में रहकर भारतीय संस्कृति की रक्षा की।

कथा विश्राम के बाद मुख्य यजमान चट्टनलाल मित्तल, बीना मित्तल ईकरी रामचरित्र मानस की आरती उतारी। मंदिर महंत पं. जगजीवन राम मिश्र इंदु गुरू जी ने बताया कि सोमवार को माता जानकी व प्रभु श्रीराम की कथा का मनमोहक वर्णन होगा।

 

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